वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः

संगठन का परिचय

एक पंजीकृत, अलाभकारी सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था — जो श्रोत्रीय ब्राह्मण समाज को संगठित करने, उसकी विद्या एवं आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण, तथा इस विरासत को शिक्षा, कल्याण एवं राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रवाहित करने हेतु कार्यरत है.

परिचय

संगठन परिचय

⚜

राष्ट्रीय श्रोत्रीय ब्राह्मण संघ एक पंजीकृत, अलाभकारी सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था है जो श्रोत्रीय ब्राह्मण समाज को संगठित करने, उसकी विद्या एवं आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण, तथा इस विरासत को शिक्षा, कल्याण एवं राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रवाहित करने हेतु कार्यरत है.

हम पहले एक सामाजिक संस्था हैं, और सदैव एक सेवा संगठन.

इतिहास

हमारा इतिहास

⚜

अधिकांश संस्थाओं से भी प्राचीन एक धरोहर

श्रोत्रीय ब्राह्मण परंपरा भारत की वैदिक विद्या की सबसे प्राचीन धाराओं में से एक है. परंपरा के अनुसार श्रोत्रीय वह ब्राह्मण है जिसने वेदों को कंठस्थ किया हो, उनके अर्थ को समझा हो, और उनके अनुशासन को अपने दैनिक जीवन में धारण किया हो.

शताब्दियों तक ऐसे परिवार भारत के मौखिक ज्ञान के संरक्षक रहे — उसके व्याकरण, उसके कर्मकांड, उसके दर्शन और उसकी नीति के.

मगध की भूमि

हमारा समाज वर्तमान बिहार में स्थित मगध को अपनी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक भूमि मानता है. प्राचीन विश्व में मगध विद्या, शासन और धर्म का महान केंद्र था. यही वह भूमि है जो आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) से जुड़ी है — आचार्य, कूटनीतिज्ञ और अर्थशास्त्र के रचयिता — जिनका जीवन और कार्य इस क्षेत्र की स्मृति में गहराई तक रचा-बसा है; और यही भूमि उन ऋषियों, आचार्यों एवं विद्वानों की भी है जिन्हें हमारा समाज सर्वोच्च आदर देता है.

कई प्राचीन विभूतियों के जन्मस्थान को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं; हम इन संबंधों को अपने समाज की सम्मानित धरोहर एवं जीवंत परंपरा के रूप में प्रस्तुत करते हैं.

उतार-चढ़ाव भरा इतिहास

श्रोत्रीय ब्राह्मण समाज की कथा, राष्ट्र की कथा की भाँति, उतार-चढ़ाव से भरी रही है — उच्च विद्वत्ता और कठिन कालखंडों की, सम्मान और संघर्ष की, इतिहास के झंझावातों में बिखरे और पुनः एकत्र हुए परिवारों की.

आक्रमणों, पारंपरिक राजाश्रय के ह्रास, औपनिवेशिक काल की उथल-पुथल और स्वतंत्र भारत के व्यापक सामाजिक परिवर्तनों के बीच समाज का भाग्य चढ़ा भी और उतरा भी. किंतु जो कभी नहीं टूटा, वह थी पिता से पुत्र और गुरु से शिष्य तक पहुँचती विद्या की अटूट डोर. कठिन समय में भी मंदिरों की व्यवस्था बनी रही. जब संस्कृत कहीं नहीं पढ़ाई जाती थी, तब भी दीपक के प्रकाश में पढ़ाई जाती रही. जिन परिवारों ने भूमि और प्रतिष्ठा खो दी, उन्होंने भी अपने ग्रंथ नहीं छोड़े.

राष्ट्रीय श्रोत्रीय ब्राह्मण संघ की स्थापना इसी इतिहास के उत्तर में हुई — बिखरी हुई शक्ति को संगठित शक्ति में, और मौन धैर्य को दृश्यमान प्रगति में बदलने के लिए.

संगठन की स्थापना

समाज के वरिष्ठजनों, विद्वानों एवं लोकहितैषी सदस्यों द्वारा [वर्ष] में स्थापित इस संगठन का उद्देश्य स्पष्ट था: समाज को एक सशक्त राष्ट्रीय स्वर देना, उसकी युवा पीढ़ी के लिए आधुनिक शिक्षा एवं अवसरों के द्वार खोलना, और उसी धर्म की भावना से व्यापक समाज की सेवा करना जिसकी हम रक्षा करते हैं.

मील के पत्थर

मील के पत्थर

यह समयरेखा संपादन योग्य है — प्रकाशन से पूर्व प्रत्येक [वर्ष] को अपनी सत्यापित तिथियों से बदलें.

  1. [वर्ष]

    संगठन की स्थापना; प्रथम कार्यकारिणी का गठन.

  2. [वर्ष]

    प्रथम राज्य इकाइयों की स्थापना.

  3. [वर्ष]

    छात्रवृत्ति कार्यक्रम का शुभारंभ.

  4. [वर्ष]

    [स्थान] में प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन.

  5. [वर्ष]

    युवा प्रकोष्ठ एवं महिला प्रकोष्ठ का गठन.

  6. [वर्ष]

    [हाल की उपलब्धि].

दृष्टि एवं ध्येय

दृष्टि एवं ध्येय

⚜

हमारी दृष्टि

एक सशक्त, शिक्षित और संगठित श्रोत्रीय ब्राह्मण समाज — जो अपनी वैदिक विरासत का सम्मान करते हुए आधुनिक भारत में विद्या, सेवा और राष्ट्र निर्माण के अग्रिम पंक्ति में खड़ा हो.

हमारा ध्येय

  • वैदिक विद्या, संस्कृत एवं समाज की सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण एवं संवर्धन करना.
  • छात्रवृत्ति, मार्गदर्शन एवं कौशल विकास द्वारा आगामी पीढ़ी को शिक्षित एवं सशक्त बनाना.
  • कल्याण, राहत एवं सामाजिक सहयोग द्वारा आवश्यकता-ग्रस्त सदस्यों का सहयोग एवं उत्थान करना.
  • बिना किसी भेदभाव के, विद्या एवं सेवा की भावना को सबके लिए विस्तारित कर व्यापक समाज की सेवा करना.
  • प्रत्येक राज्य एवं ज़िले में समाज को एक संगठित, पारदर्शी एवं उत्तरदायी मंच पर एकजुट करना.
उद्देश्य

हमारे उद्देश्य

⚜
  1. श्रोत्रीय ब्राह्मण समाज को राष्ट्रीय स्तर पर संगठित करना तथा गरिमा के साथ उसके हितों का प्रतिनिधित्व करना.
  2. वैदिक एवं संस्कृत शिक्षा हेतु संस्थानों की स्थापना एवं सहयोग करना.
  3. समाज के योग्य विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति एवं शैक्षणिक सहायता प्रदान करना.
  4. कठिनाई में पड़े सदस्यों की कल्याण एवं राहत उपायों द्वारा सहायता करना.
  5. समाज के इतिहास, वंशावली एवं धरोहर का प्रलेखन, संरक्षण एवं प्रकाशन करना.
  6. समाज से जुड़े मंदिरों तथा सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व के स्थलों की रक्षा एवं देखरेख करना.
  7. संगठन के जीवन एवं नेतृत्व में युवाओं और महिलाओं की सहभागिता को प्रोत्साहित करना.
  8. सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना तथा ऐसी सेवा गतिविधियाँ चलाना जिनसे संपूर्ण समाज लाभान्वित हो.
  9. समस्त वित्तीय एवं प्रशासनिक विषयों में पूर्ण पारदर्शिता एवं जवाबदेही बनाए रखना.
  10. साझा सरोकार के विषयों पर सरकार, शैक्षणिक एवं नागरिक संस्थाओं के साथ सहयोग करना.
संविधान

संविधान एवं नियमावली

⚜

राष्ट्रीय श्रोत्रीय ब्राह्मण संघ एक लिखित संविधान (नियमावली) द्वारा संचालित है, जो उसके लक्ष्यों, सदस्यता, शासन-संरचना एवं आचरण-नियमों को परिभाषित करता है. संविधान संगठन का सर्वोच्च दस्तावेज़ है; समस्त इकाइयाँ एवं पदाधिकारी उसी की परिधि में कार्य करते हैं.

संविधान में अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित व्यवस्थाएँ हैं:

संगठन का वैधानिक नाम, उसके पंजीकृत कार्यालय का पता, तथा वह भौगोलिक क्षेत्र जिसमें वह कार्य करता है.
संगठन के प्रयोजन तथा यह पुष्टि कि उसकी आय का कोई भाग सदस्यों में वितरित नहीं होता; समस्त निधि घोषित उद्देश्यों पर ही व्यय होती है.
कौन सदस्य बन सकता है, सदस्यता की श्रेणियाँ, प्रत्येक श्रेणी से जुड़े अधिकार, तथा सदस्यता ग्रहण करते समय स्वीकार किए जाने वाले दायित्व.
केंद्रीय कार्यकारिणी, राज्य इकाइयाँ, ज़िला इकाइयाँ एवं मार्गदर्शक मंडल — प्रत्येक का गठन कैसे होता है, वह क्या निर्णय ले सकता है, और कितने समय तक पद पर रहता है.
चुनाव प्रक्रिया, सूचना की अवधि, साधारण एवं कार्यकारिणी बैठकों का संचालन, तथा वैध निर्णय हेतु आवश्यक गणपूर्ति.
बैंक खाते, हस्ताक्षरकर्ता, बजट, योग्य लेखा-परीक्षक द्वारा वार्षिक ऑडिट, तथा संगठन की निधि का अनुमत उपयोग.
संविधान में संशोधन हेतु आवश्यक बहुमत, तथा संगठन के विघटन की स्थिति में संपत्ति के उपयोग की व्यवस्था.

इस लिंक को सक्रिय करने हेतु हस्ताक्षरित PDF को /downloads/constitution.pdf पर रखें.

संगठनात्मक ढाँचा

संगठनात्मक ढाँचा

⚜

संगठन एक स्पष्ट, स्तरीय ढाँचे पर कार्य करता है जो ज़मीनी स्तर को राष्ट्रीय नेतृत्व से जोड़ता है.

केंद्रीय कार्यकारिणी
राज्य इकाइयाँ
ज़िला इकाइयाँ
सदस्यगण

इस शासन-व्यवस्था को सहयोग देते हैं:

मार्गदर्शक मंडल
युवा प्रकोष्ठ
महिला प्रकोष्ठ
स्थायी समितियाँ

मार्गदर्शक मंडल

वरिष्ठ विद्वान, अनुभवी जन एवं प्रतिष्ठित सदस्य जो नीति का मार्गदर्शन करते हैं.

युवा एवं महिला प्रकोष्ठ

प्रत्येक स्तर पर युवाओं एवं महिलाओं की सहभागिता हेतु समर्पित निकाय.

स्थायी समितियाँ

शिक्षा; संस्कृति एवं मंदिर; सदस्यता; वित्त एवं लेखा-परीक्षा; मीडिया एवं संचार.

संगठन के साथ खड़े हों

संविधान पढ़ें, नेतृत्व से मिलें, अथवा सबसे सरल कदम उठाएँ — सदस्य बनें.